अध्याय 30

जैसे ही वह मुझसे दूर हुआ, मेरी आँखों में चमक रही चाहत एक पल में बिना किसी निशान के गायब हो गई—बस सतह के नीचे एक हल्की-सी धारा रह गई।

मैंने अपने कपड़ों को सँभाला और उसके पीछे-पीछे सीढ़ियों की तरफ गई, नीचे झाँकते हुए।

लैंडिंग पर इसाबेला बैठी थी, घुटना पकड़े हुए; उसका छोटा-सा चेहरा दर्द से मरोड़ खाया...

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